This group tracks the responses of shipping industry towards environmental health concerns, highlights influence of shipping companies from EU, US and Japan etc on IMO and its Marine Environment Protection Committee & South Asian governments. It is keen to restore beaches in India, Bangladesh and Pakistan to their pristine glory for the coming generations. For more information visit: www.toxicswatch.org, banasbestosindia.blogspot.com

25/12/2009

वापस जाना होगा प्लेटिनम-2 जहाज को

अलंग (गुजरात) के समुद्र तट पर खड़े यूएस जहाज प्लेटिनम-2 को वापस जाना होगा। केंद्र सरकार ने गुजरात सरकार से कहा है कि प्लेटिनम -2 को अलंग में बीचिंग और ब्रेकिंग की इजाजत न दी जाए। क्योंकि इसमें बेहद जहरीले पदार्थ और रेडिओएक्टिव सबस्टेंस हैं। पर्यावरण बचाने की लड़ाई लड़ रहे लोगों ने इसे एक बड़ी जीत करार दिया है। साथ ही मांग की है कि अलंग में खडे. बाकी के 200 जहाजों की भी जांच की जाए। मुमकिन है कि वह भी इसी तरह नियम कानूनों को ताक पर रखकर यहां आए हों।

सोमवार को वन और पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात मेरिटाइम बोर्ड (जीएमबी) को चिट्ठी लिखकर कहा है कि प्लेटिनम-2 ने यूनाइटेड स्टेट्स टॉक्सिक सबस्टेंसेज एक्ट का उल्लंघन किया है। यह जहाज झूठे दस्तावेजों के सहारे यहां आया। मंत्रालय ने जहाज की जांच के लिए एक टेक्निकल टीम गठित की थी जिसने 26 अक्टूबर को मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट जमा की थी। रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय ने यह फैसला लिया। गौरतलब है कि फरवरी 2006 में फ्रेंच जहाज क्लेमेन्शु को भी इसी तरह वापस जाना पड़ा था। प्लेटिनम- 2 को लेकर सबसे पहले आवाज बुलंद करने वाले टॉक्सिक वॉच के गोपाल कृष्ण कहते हैं कि यह एक बड़ी जीत है। इससे एक संदेश जाएगा और अब जो भी जहाज यहां आएंगे उन्हें नियमों का पालन करना पड़ेगा।

जब प्लेटिनम -2 भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था तभी सवाल उठे थे कि इस जहाज का कोई खरीदार नहीं है तो यह भारतीय सीमा में अवैध तरीके के कैसे दाखिल हो गया। इस जहाज पर खुद अमेरिकी प्रशासन भी जुर्माना लगा चुका है। अंतराष्ट्रीय संधि के मुताबिक जब तक जहाज को पूरी तरह से क्लीन घोषित न कर दिया जाए तब तक उसे किसी देश में टूटने के लिए नहीं भेजा जा सकता। अलंग के शिपब्रेकिंग यार्ड में हर साल सैकड़ों जहाज टूटने के लिए आते हैं। भारत के अलंग और बांग्लादेश के चटगांव दो बड़े शिपब्रेकिंग सेंटर हैं। गोपाल कृष्ण कहते हैं कि कानून के मुताबिक जहाज जब तोड़ने के लिए भेजे जाते हैं तो उन्हें पूरी तरह से जहरमुक्त करते भारतीय सीमा में प्रवेश दिया जाना चाहिए लेकिन शिपब्रेकिंग यार्ड की लॉबी काफी मजबूत हो। वह कानूनों का उल्लंघन करते रहते हैं और अब तक किसी को कोई सजा नहीं हुई है। जहाजों पर खतरनाक पदार्थ की वजह से हर साल अलंग में सैकड़ों मजदूर मरते हैं और इसकी तादाद किसी भी दूसरे उद्योग से ज्यादा है।

पूनम पाण्डे ।। नई दिल्ली

http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5212563.cms

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